मालेगांव बम विस्फोट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने समीर कुलकर्णी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी है

सुप्रीम कोर्ट ने 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले के आरोपियों में से एक समीर कुलकर्णी को बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने कुलकर्णी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी। यह अंतरिम रोक है, जो अगले आदेश तक जारी रहेगी। ⁠कुलकर्णी की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत समीर के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए ली गई मंजूरी उचित नहीं थी। लिहाजा उनके खिलाफ ट्रायल चलाया जाना गैर-कानूनी है। न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाई। अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी। बता दें कि समीर कुलकर्णी ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत कार्यवाही पर रोक लगाने के लिए शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि उन पर मुकदमा चलाने के लिए ली गई मंजूरी उचित नहीं थी। मामले में शीर्ष अदालत द्वारा महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। कुलकर्णी की तरफ से वकील विष्णु शंकर जैन द्वारा अदालत में पेश होकर याचिका दायर की गई।  याचिका में यूएपीए की धारा 45(2) के तहत वैध मंजूरी के बिना ट्रायल कोर्ट के मुकदमा चलाने के फैसले को चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया है कि बिना किसी अधिकार क्षेत्र के ऐसी कार्यवाही की जा रही है, लिहाजा कोई भी मुकदमा शुरू नहीं हो सकता। विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को बेवजह परेशान किया जा रहा है और  उसके अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है। याचिका में बॉम्बे हाईकोर्ट के 28 जून 2023 के आदेश को भी चुनौती दी गई। दरअसल बॉम्बे हाईकोर्ट ने एनआईए अदालत के 24 अप्रैल 2023 के आदेश को बरकरार रखा था। इससे पहले एनआईए कोर्ट ने कुलकर्णी की याचिका खारिज कर दी गई थी। बता दें कि समीर कुलकर्णी, भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित सहित छह अन्य लोग मालेगांव में हुए विस्फोट के लिए मुकदमे का सामना कर रहे हैं।

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