साल के अंत में महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव. विपक्षी महा विकास अगाड़ी ने लोकसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन को एक तरह से ध्वस्त कर दिया। अगाड़ी ने 48 सीटों में से 30 सीटों पर कब्जा कर लिया है. ऐसे में विपक्ष जोश में है. लेकिन सुनने में आया है कि चुनाव की तैयारियों की शुरुआत में ही वे लड़खड़ा गये. कौन होगा मुख्यमंत्री का चेहरा? यही असली समस्या है. लेकिन शरद पवार ने बुधवार को कहा कि मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा, इसकी पहले से घोषणा करने की जरूरत नहीं है. वे सामूहिक नेतृत्व के लिए लड़ेंगे. उनकी टिप्पणियाँ महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। शिवसेना का उद्धव ठाकरे खेमा हाल ही में उद्धव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की मांग उठा रहा है. लेकिन पवार का दावा है कि अगर विपक्ष वास्तव में सत्ता में आता है तो गठबंधन में सबसे अधिक सीटें पाने वाली पार्टी को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। उन्हें यह कहते सुना गया, ”मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर कोई विवाद नहीं है. अब इस बारे में सोचने की जरूरत नहीं है. सीटों की संख्या से तय होगा कि नेतृत्व कौन करेगा. चुनाव से पहले इस पर कोई फैसला लेने की जरूरत नहीं है.” इस मुद्दे पर बोलते हुए एनसीपी सुप्रीमो ने आपातकाल के बाद होने वाले लोकसभा चुनाव का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा, ”आपातकाल के बाद मोरारजी देसाई के नाम की घोषणा की गई थी. लेकिन वोट मांगते वक्त उनके नाम की घोषणा नहीं की गई. इस तरह इस बार मुख्यमंत्री के तौर पर किसी का नाम बताने की जरूरत नहीं है. हम एक साथ हो जाएंगे और जनादेश मिलने के बाद मैं स्थायी सरकार बनाऊंगा.”
महाराष्ट्र में विपक्ष “मुख्यमंत्री का चेहरा” उधव!
